गुमनामी से बदनामी भला

.गुमनामी से बदनामी भला, लोग याद तो किया करते है। 

और बदनाम वही होते है, जो नेक काम किया करते है।। 

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मुझको मेरे गाँव की होली याद बहुत आती है

मुझको मेरे गाँव की होली याद बहुत आती है

 

मुझको मेरे गाँव की होली याद बहुत आती है ।

बहती पुरवाई मानो दिल खींच गाँव ले जाती है ।।

मुझको मेरे गाँव की होली याद बहुत आती है ।।

HOLI (ART BY SIDDHANT )

फाल्गुन मॉस के आते ही इक अलग नशा छा जाता था ,

हंसी ठिठोली ताने बोली का माहौल बन जाता था ।

दादा बाबा ताऊ चाचा एक संग हो जाते थे ,

फगुआ गाते धूम मचाते मिलकर रंग जमाते थे ।।

वो मधुर तान और गाने की बोली कानो में अभी सुनाती है ,

मुझको मेरे  गावं की होली याद बहुत आती है ।।

पूरे साल भले लड़ते हो, चाहे दुश्मनी जानी हो,

होली के दिन ऐसे मिलते जैसे रिश्ता बहुत पुरानी हो ।

चाची जो गली बकती थी , फूटे आँख नहीं सुहाती थी ,

पर उस दिन पकवान बनाकर, पहले मुझे खिलाती थी ।।

वो गुलगुला, गुझिया मालपुआ की खुशबू अब ललचाती है ,

मुझको मेरे गाँव की होली याद बहुत आती है ।।

वो पहली बार जब मैंने उसके गाल पर रंग लगाया था,

उस पल मानो जैसे कोई बड़ा खजाना पाया था ।

कुछ चिढ़ी थी वो कुछ शरमाई भी, मैं था डर से काँप गया,

बाल्टी कर रंग लेकर दौड़ी तो उसका मनसा भांप गया ।

जो शर्ट रंगी थी आज भी उसके होने का एहसास कराती है ,

मुझको मेरे गाँव की होली याद बहुत आती है ।।

बड़े हुए तो शहर आ गए रुपये बहुत कमाने को ,

तब से मौका नहीं मिला होली पर गाँव को जाने को ।

हरा लाल नारंगी पीला कितने रंग लुभाती थी,

गाँव की होली का रंग तन मन अन्दर तक रंग जाती थी ।।

शहर की होली का रंग मानो कपड़े ही रंग पाती है ,

मुझको मेरे गाँव की होली याद बहुत आती है ।।

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प्राइवेट कर्मचारी की छुट्टी की समस्या- LEAVE PROBLEM FOR EVERY PRIVATE EMPLOYEE

प्राइवेट कर्मचारी की छुट्टी की समस्या- LEAVE PROBLEM FOR EVERY PRIVATE EMPLOYEE

 

प्राइवेट कर्मचारी की छुट्टी की समस्या  एक बड़ी समस्या होती है । हमारे देश  देश में एक अधिक संख्या में लोग  प्राइवेट नौकरी करते है । प्राइवेट नौकरी करने वालो के साथ कई तरह की समस्या होती रहती है l कभी छुट्टी को लेकर, कभी वेतन बढाने को लेकर, कभी पदोन्नति (promotion) को लेकर आदि । इन सभी परिस्थितियों से कैसे निपटा जा सकता हैं इसके लिए निम्न बातों का ध्यान रखे :

जब छुट्टी की जरुरत हो –  Application For Leave 

सभी कंपनियों में प्राइवेट कर्मचारी की छुट्टी की समस्या होती ही है । जब   हमें छुट्टी की जरूरत होती है तो हमें एक आवेदन पत्र देना होता है जिसे हम अपने मैनेजर या टीम लीडर को सौपते है , उसके बाद वो निर्णय लेता है की हमें छुट्टी मिलेगी या नहीं, अगर मिलेगी तो कितने दिन की ।

छुट्टी के लिए आवेदन

उदाहरण के लिए संजय नाम का व्यक्ति है और उसके घर पर शादी है, अब उसने 15 दिन की छुट्टी का आवेदन किया है । अब यहाँ यह निश्चित है की उसे 15 दिन की छुट्टी तो नहीं मिलेगी । ज्यादा से ज्यादा 10 दिन का ही पास होगा । हाँ अगर उसने 20 दिन के लिए आवेदन किया होता तो 15 दिन अवश्य मिल जाता । दूसरी स्थिति ऐसी आती है कोई जरुरी काम अचानक ही जाता है और 2-3 दिन की छुट्टी चाहिए होती है तो हमारा मैनेजर या टीम लीडर उस छुट्टी के लिए साफ़ मना कर देगा या ज्यादा से ज्यादा 1 दिन में वापिस आने के लिए बोलेगा ।

उदाहरण के लिए संजय को 2 दिन के लिए अपने किसी दोस्त की शादी में जाना है या कोई ऐसा ख़ास व्यक्ति है जिसका  उसके ऊपर बहुत सारे एहसान है और उसे अभी किसी काम की सहायता की लिए उसकी जरुरत है । अब ऐसी स्थिति में संजय को छुट्टी नहीं मिलती है तो उसे क्या करना चाहिए !

  • या तो वो 1 दिन की छुट्टी लेकर जाये और अगले दिन ड्यूटी ज्वाइन कर ले ।
  • या तो छुट्टी न मिलने का बहाना बनाकर अपने दोस्त को मना कर दे ।

अगर वो 1 दिन में वापिस आ जाता है तो हो सकता है उसके दोस्त नाराज हो जाये, लेकिन एक दिन की वजह से मान भी सकते है , लेकिन ऐसी स्थिति में संजय का मन भी उदास ही रहेगा की पूरा समय नहीं दे पाया ।और अगर वो नहीं जाता है तो दोस्ती हमेशा के लिए खत्म और उसके मैनेजर को भी लगेगा की उसे ऐसी कोई ख़ास जरुरत नहीं थी ।अब संजय को क्या करना चाहिए –

उसे छुट्टी मिले या न मिले पूरा समय अपने दोस्त की शादी या जो भी जरुरत हो उसे देना चाहिए, क्योकि अगर वो नहीं शामिल होता है तो उसे जिन्दगी भर उसका पछतावा रहेगा । अगर वो छुट्टी लेकर चला जाता है तो वापिस आने पर ज्यादा से ज्यादा मैनेजर उसे सुनाएगा और फिर उसे काम करने को बोलेगा ।

प्राइवेट कर्मचारियों को ध्यान रखने वाली बातें-

अगर 3 दिन की छुट्टी की जरुरत हो तो 5 दिन के लिए आवेदन करे ।

छुट्टी न मिलने पर भी जहाँ जरुरी हो वहां जरुर जाये।

नौकरी की वजह से अपने दोस्तों और परिवार को समय देने से इंकार न करे ।

कम्पनी ज्वाइन करने के शुरुआती दिनों में ही अपने काम से लोगो को प्रभावित करे ।

अपने काम से अपने मैनेजर, बॉस को अपने ऊपर निर्भर होने को मजबूर कर दे ।

शुरू से ही एक अलग छबि बना कर रखे चाहे वो बनावटी ही क्यों न हो ।

अपने परिवार की बाते ऑफिस में किसी से चर्चा न करे ।

अगर उस कम्पनी में समयानुसार आपकी वेतन न बढे या पदोन्नति न मिले तो तुरंत उसे छोड़ दे ।

किसी भी कम्पनी को अपना भविष्य मान कर न रहे, जब तक आपकी जरुरत बनी रहेगी आपको सम्मान मिलेगा, जैसे ही आपसे कोई बेहतर मिल गया तो आपको निकालने में देरी नहीं लगेगी ।

प्राइवेट नौकरी करने से बेहतर है की अपना व्यवसाय करे अगर आप एक ऊँचे पद पर काम न करते हो ।

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शादी के बाद बेटे को पराया कर दिया जाता है ! SHADI KE BAAD BETE KO PARAYA KAR DIYA JATA HAI

शादी के बाद बेटे को पराया कर दिया जाता है !

हमारे देश में यही माना जाता है की बेटियों परायी होती है लेकिन मैं एक सच्चाई और बताना चाहता हूँ की बेटियां तो परायी होती है लेकिन शादी के बाद बेटो को पराया कर दिया जाता है l

घर में बहु से ज्यादा बेटो के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है

कहते है शादी के बाद बेटे अपनी पत्नी का साथ देने लगते है और माँ बाप को भूल जाते है l माँ बाप ने बड़ी मुश्किल से अपने बच्चों को पाला होता है इसी उम्मीद के साथ के वो बुढ़ापे में उनका सहारा बनेंगे l लेकिन बेटे है की शादी होते हे माँ बाप को भूल जाते है और अलग रहने लगते है l जबकि सच्चाई उसके उल्टा ही होता है l मैं आपको बताता हूँ की लडको के साथ क्या होता है :

आप सब ने यह महसूस किया होगा की जब तक हमारी शादी, मेरा मतलब की लडको की शादी नहीं होती तब तक वो अपने परिवार में किसी के साथ लड़ झगड सकते है, किसी को भी परेशान कर सकते है l अपने छोटे भाई बहन को जो चाहे बोल सकते है, डांट सकते है l पिता से किसी भी चीज को लेकर जिद कर सकते है l नाराज हो सकते है अपनी माता की छोटी छोटी बातो पर l कभी काम किया कभी नहीं करने का बहाना बना सकते है , फिर भी परिवार के दुलारे बने रहते है l
शादी होते ही सब एकदम उल्टा हो जाता है l जिस बहन को वो अभी तक हक़ से डांट सकता था उसे छोटी सी बात बोलने से भी सोचना पड़ता है , क्योकि वही बहन पलट कर जवाब देती है की जाकर अपनी बीवी के ऊपर चिल्लाओ, हक़ जातो, तुम मुझे कमाकर खिला नहीं रहे हो l

जिस माता से खाना पानी मांगता रहता था वही अब कभी कभार बोल देती है को मैडम जी किसलिए है तुम्हे खाना पानी नहीं दे सकती है क्या l
अगर एक दिन काम के लिए न जाये तो पिता की बात सुनने को मिलती है की कमाएगा नहीं तो क्या खायेगा l मैं अब कमाकर नहीं खिलाने वाला दोनों पति पत्नी को l कल तक जो बेटा सबका लाडला था आज मनो जैसे एक पत्नी के आते है अपने आपको पराया महसूस करने लगता है l

इन सभी बातो के वजह से वो बीवी की तरफ खिंचा चला जाता है और फिर शुरू हो जाते है अलगाव होने की स्थितिया जो धीरे धीरे बड़ा रूप ले लेती है l और फिर एक दिन वो अपने परिवार से अलग अपनी पत्नी के साथ रहने लगता है और फिर उसे एक नालायक बेटे का दर्जा दे दिया जाता है l

इस पुरे प्रकरण में बेचारा लड़का ही पिसता है और लोग कहते है की लड़की परायी होती है लेकिन लड़के को तो पराया कर दिया जाता है l

अब आप लोगो को क्या राय है, अपने विचार जरुर लिखे l

अकेलानंद

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जीना जब आसान लगे, इक बार मुहब्बत कर लेना (JEENA JAB ASAN LAGE EK BAAR MOHABBAT KAR LENA )

“जीना जब आसान लगे, इक बार मुहब्बत कर लेना “

जीना जब आसान लगे,

इक बार मुहब्बत कर लेना l

जब अच्छा हर इन्सान लगे,

एक बार मुहब्बत कर लेना ll

यौवन जब अंगड़ाई ले,

मस्ती में कुछ न दिखाई दे l

संगी साथी सब प्यार करे,

इक दूजे से इजहार करे II

खुशनुमा सभी हालात लगे,

इक बार मुहब्बत कर लेना I

जब अच्छा हर इन्सान लगे,

इक बार मुहब्बत कर लेना II

जब मिली नौकरी पक्की हो,

इच्छा अनुसार तरक्की हो I

दफ्तर में सबसे सम्मान मिले,

घर वालो का अभिमान मिले II

जब सस्ता हर सामान लगे,

इक बार मुहब्बत कर लेना I

जब अच्छा हर इन्सान लगे,

इक बार मुहब्बत कर लेना II

ये हंसी तुम्हारे चेहरे की,

पल भर में ही खो जाएगी I

बहकें बहके से फिरते रहोगे,

रात को नीद न आयेगी II

आँखों के आंसू तक सूखेंगे ,

सांसे भी घुट जाते है I

कहते है अकेलानंद यही की,

प्यार में सब लुट जाते है I

गर तुमको न विश्वास लगे,

इक बार मुहब्बत कर लेना II

जब अच्छा हर इन्सान लगे ,

इक बार मुहब्बत कर लेना II

जीना जब आसान लगे,

इक बार मुहब्बत कर लेना II

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मेरे साथी – मेरी जान (MERE SATHI – MERI JAAN )

मेरे साथी – मेरी जान

तू दोस्त है ,  तू साथी है ,

तू जान है, तू जहान है I

तू ही प्रिये, प्रियतम तू ही ,

तू दिल की हर अरमान है II

 

मुझे एक फिक्र रहती हरदम,

मेरा भी कोई हमदम होता I

रहता हर पल वो साथ मेरे ,

चाहे ख़ुशी हो या फिर गम होता II

जिसे ढूंढ रही थी ये आँखे ,

वो इश्वर का वरदान है I

तू दोस्त है तू साथी है ,

तू जान है तू जहान है II

 

बिन तेरे था जीवन सूना ,

दिल की हर बात थी अनसूना I

इक पल भी आँखे नम जो हुई,

पग डोले, हिम्मत कम जो हुई I

तुम साथ थी हर पल ये कहते ,

आगे बढ़ साथ में मैं हूँ न II

हर दुःख को पल में हर लेती,

तेरी ये मधुर मुस्कान है I

तू दोस्त है तू साथी है ,

तू जान है तू जहान है II

 

अब तक जाने आये कितने ,

सब मतलब के, कोई  न अपने I

जिसका भी जितना साथ दिया ,

उसने उतना ही घात किया I

तुझको पाकर मैं धन्य हुआ,

है वादा कभी न बिछ्ड़ेंगे ,

हर मुश्किल से लड़ बैठेंगे I

चाहे कितना भी बड़ा तूफ़ान है II

कहता है अकेलानंद यही ,

तू ही मेरा स्वाभिमान है I

तू दोस्त है तू साथी है ,

तू जान है तू जहान है I

तू ही प्रिये, प्रियतम तू ही ,

तू दिल की हर अरमान है II

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एकतरफा प्यार

एक- तरफा प्यार

हम दोनों कुछ यूँ ही मिले थे,

न जाने कब के सिलसिले थे l

प्यार हमें बिना तर्क था , 

लेकिन उसमे कुछ फर्क था ll

मैं सच्ची मोहब्बत करता था,

वो कच्ची मोहब्बत करती थी l

मैं जी जान से उसपर मरता था ,

और वो टुकडो में मरती थी ll

दिल की बातें अपने दिल से ,

मैं रोज उसे बतलाता था l

है इश्क मुझसे तुमसे कितना,

बस हर पल यही जताता था ll

वो आधे मन से मेरी बातें, 

सुन करके  बात घुमा देती l

प्यार से नजर मिलाने पर, 

वो पलके अपनी झुका लेती ll

मैं समझा था है शर्मीली, 

इसलिए वो नजर झुकाती है l

है कुछ तो प्यार उसे मुझसे, 

वो तभी तो मिलने आती है ll

मेरे लिए संकल्प थी वो, 

मैं उसके लिए विकल्प सदा l

वो मेरे हर साँस में बसती थी ,

मैं जीवन में उसके यदा कदा ll

वो छोड़ मुझे जा सकती है ,

मैं फिर भी उसको  चाहूँगा l

वो प्यार भी केवल मेरा था,

अब मैं ही उसे निभाऊंगा ll


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वो जिन्दगी में आते ही क्यों हैं ………

वो जिन्दगी में आते ही क्यों है,

यूँ देखकर मुस्कराते क्यों है l

जुदाई का दर्द सहा नहीं जाता ,

यूँ अकेला छोड़कर जाते क्यों है II

पहले तो जी भर कर हंसाते है हमको ,

फिर टूटे दिल तक रुलाते क्यों है I

हर पल खुशियों  से भर देते है झोली,

फिर नाराजगी से सताते क्यों है II

जिसके बिना कोई रौनक नहीं थी ,

उसको ही महफ़िल से भगाते क्यों है I

जब दुश्मन के जैसी करनी थी हरकत,

तो पहले अपनापन जताते क्यों है ll

जिन्दगी तो अकेले ही कटनी थी अकेलानंद,

फिर किसी को अपना  बनाते क्यों है l

प्यार ही सब कुछ होता था यारो,

ऐसी अफवाह फैलाते क्यों है II

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करना है तो कर वरना टाइम पास मत कर

करना है तो कर, वरना टाइम पास मत कर

तेरे जैसे आये कितने छत्तीस मेरे लाइफ में,

उन सबमे में थे सारे गुण, जैसे एक तवाइफ़ में l  

साथ घूमना शापिंग करना हर लड़की का पेशा है,

केवल तुमसे प्यार करे, देखा न कोई ऐसा है l

कहता हूँ मैं बात ये सच्ची, दम हो तो बर्दाश्त कर

करना है तो कर, वरना टाइम पास मत कर ll

दिन का चैन, नीद रात की,  हम सब लड़के खोते है,

तब जाकर कही जरा सा बैंक बैलेंस जोड़ते है l

तुम सब केवल हुश्न दिखाकर, सारा मॉल उड़ाती हो,

मन में होता कपट तुम्हारे, झूठा प्यार दिखाती हो l

खुद के पैसो पर ऐश करो, ऐसी अपनी औकात कर

करना है तो कर, वरना टाइम पास मत कर ll

 

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तू तो कहता था तुझे प्यार नहीं है

तू तो कहता था तुझे प्यार नहीं है,

तो अपने आप को  जलाता क्यों है l

तू तो कहता था तुझे दर्द भी नही होता,

तो अपने आँखों से बताता क्यों है ll

माना की उसकी जुदाई से तुझे गम नहीं,

फिर यूँ ही अपने दिल को रुलाता क्यों है l

एक एक करके दूर हुए तुझसे अपने,

फिर भी उनसे अपनापन जताता क्यों है ll

नहीं लिखा प्यार अगर तेरी जिन्दगी में,

फिर भी अपनी किस्मत आजमाता क्यों है l

तू तो पहले भी अकेला था ऐ अकेलानंद,

फिर गैरो से महफ़िल सजाता क्यों है ll

मिटा दे हर किसी की याद अपने दिल से,

याद कर उन्हें झूठा ही मुस्कराता क्यों है ll

तू तो कहता था तुझे प्यार नहीं है,

तो अपने आप को जलाता क्यों है ll

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एहसास आंसुओ के सैलाब का

तुम्हारी पलको के भीगने के एहसास मात्र से ही जिसका दिल रो पड़ता हो, वही तुम्हारी आँखों में आंसुओ के सैलाब से भी न पिघले, तो समझ लेना वजह बहुत ही बड़ी है l 

 “तेरी यादों में सदा खोये रहते है ,

अब तो बिना सपनों के सोये रहते है l 

तूने कभी इन आँखों की गहराई  न देखी ,

ये बिना आंसुओ के भी रोये रहते है “ll 

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जो कभी हर मुस्कान पर मरते थे

कभी जो मरते थे हर मुस्कान पर मेरी,

वो मेरी हंसी पर पहरा लगाने लगे है l

सुलाते थे जो मुझको पलकों पर अपनी,

आज रात – दिन वो जगाने लगे है ll

तरसता हूँ  मिलने को कहते थे हर पल,

अब एक पल में भगाने लगे है l

पहले तो देते है जख्म जी भरके ,

फिर बेवजह मरहम लगाने लगे है l

शिकायत करू क्या खुदा से भी अब मै,

ऐसे क्यों इंसान बनाने लगे है l

सदा टूट जाता है जब दिल तुम्हारा ,

फिर भी क्यों किस्मत आजमाने लगे है ll

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फासला – रूठने और मनाने के बीच का

हम सभी लोगो के बीच रूठने और मनाने का सिलसिला चलता रहता है चाहे वो रिश्ता हमारे खून का हो, दोस्ती का हो या फिर किसी अजनबी से रिश्ते का l कभी कभी तो लोग इसलिए रुठते है ताकि वो दुसरे पर अपने अधिकार को जता सके l 

रूठने से एक तरफ जहाँ प्यार का,  रिश्ते का, अपनेपन  के एहसास का पता चलता है वही कभी- कभी ये दूरी का भी कारण बन जाता है I कहते है रूठे रब को मनाना आसान है पर रूठे यार को मनाना मुश्किल I परन्तु रूठना उसी के लिए उपयुक्त होता है जिसका कोई मनाने वाला हो l बेवजह ही रूठकर अपने आप को व्यंग्य का स्रोत नही बनाना चाहिए l

अब आता है मनाने वाले की भूमिका –     रूठने वाले से ज्यादा मनाने वाला समझदार होना चाहिए l अगर आपका कोई दोस्त रूठ कर चला जाता है लेकिन आपको उसे मनाने का मार्ग नहीं पता है तो  आप उसे खो भी सकते है l और रूठने और मनाने के बीच का फासला अत्यंत ही गम्भीर हो जाता है , कभी –कभी तो हम सोचते है की अगर सामने वाला रूठकर गया है तो स्वयं ही वापस भी आ जायेगा l और  हम उसे मनाने के लिए बिलम्ब कर देते है l मैं आपको यह सलाह अवश्य देना चाहूँगा की अगर आपका कोई अपना रूठकर गया है तो अविलम्ब उसे मनाकर वापस ले आये l  क्योकि इंसान जब किसी कारण से रूठकर जाता है तो उसके मस्तिष्क में विचारों का एक द्वन्द चल रहा होता है l अगर उन विचारों पर अंकुश न लगाया जाये तो यह एक भयानक रूप भी ले लेती है l ऐसी स्थिति में कभी – कभी वो दूसरो की  सलाह भी लेने लगता है और शायद आपको ये पता होना चाहिए ऐसी स्थिति में सलाह देने वाला कभी आपका भला नही सोचेगा l और फिर ये आपसे दूर जाने का एक कारण भी बन सकता है l

रूठने का कारण – रूठने और मनाने की प्रक्रिया तो आजीवन चलती रहती है l अब यंहा विचार करने वाली ये बात है की रूठने का कारण क्या है l क्या वो कारण एक साधारण सी बात हो जिसके ऊपर ध्यान देने या न देने से कोई फर्क नहीं पड़ता, तो यकीन मानिये रूठने वाला ज्यादा देर तक आपसे दूर नहीं रह सकता l

लेकिन अगर कारण बड़ा है, जिसके वजह से आपकी जिन्दगी पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव पड़ रहा है तो उस स्थिति में आपको अपने दोस्त की बात मानने में कोई त्रुटी नहीं है  l क्यों की इस कारण से रूठने वाला आपका दोस्त सम्भवतः आसानी से आपकी जिन्दगी में वापिस नहीं आयेगा l और अगर मान ले की वह आपके प्यार की वजह से वापस आ भी जाता है , तब तक बहुत देर हो चुकी होती है l और जो अनहोनी या यूँ कहे की जिसे होने की सम्भावना की वजह से वो आपसे रूठकर गया था , तब तक वो घट चुकी होती है l और अब ऐसी स्थिति में उसके होने या न होने से कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता l वह तो मात्र एक औपचारिकता ही होगी l

सच्चे  लोग आपकी जिन्दगी में बड़ी किस्मत से मिलते है , जो आपकी भलाई के लिए अपने आपको त्याग देते है l

इसलिए अगर आपका कोई दोस्त, नजदीकी, आपका चाहने वाला आपसे रूठकर जाता है तो समय रहते उसे मना लीजिये l क्योकि ये फासला जितना अधिक होगा, उसके वापस आने की उम्मीद उतनी कम होती जाएगी l

” रूठे यार मनाइये  , मत करिएगा विलंब l

बिन यार तुम्हारी जिन्दगी, खड़ा रहा स्तम्भ ll “

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प्यार वरदान है तो मोह अभिशाप

 प्यार अगर वरदान है तो वही मोह अभिशाप बन जाता है l किसी भी इंसान का अपनी परिस्थिति के वश में हो जाना और उसके अनुसार आचरण करना तो उसकी विवशता हो जाती है l परन्तु यदि आप किसी के मोह वश हो जाये और आपकी हंसी , आपका आनंद, आपका चैन दूसरे की बर्ताव पर निर्भर करे  तो यकीन मानिये आप उसके पूर्णतया अधीन हो चुके है l आपके मस्तिष्क पर उस इंसान का नियंत्रण हो चुका है l और आपकी मनोदशा विक्षिप्त हो चुकी है l हर पल, हर घडी , प्रत्येक स्थिति में आप उसी का चिंतन कर रहे होते है l

आप  अपना महत्व खत्म कर चुके है , अब आपकी गुणवत्ता एक निमित्त मात्र रह गयी है l

जिस तरह से एक कठपुतली का नृत्य दिखाने वाला मदारी का सम्पूर्ण नियंत्रण उसके कठपुतली पर होता है , वो जिस दिशा में चाहे , जिस कोण से चाहे उसे नचा सकता है , उससे जो भी भाव प्रकट करना चाहे या वाक्य कहना चाहे , वो सब कर सकता है l आपकी स्थिति भी एक कठपुतली की तरह हो जाती है l 

फिर भी  आप किसी के मोहवश में हो चुके है तो कठपुतली की जगह बुत बनना उचित रहेगा l आपको मौन धारण कर लेना चाहिए , और एक तरह से अपने आपको उसके सम्मुख निष्क्रिय बना देना चाहिए l ऐसी स्थिति में न तो आपके उपर किसी तरह का मानसिक दबाव रहेगा और न ही कोई दूसरा आपको अपने इशारे पर नचाने की चेष्टा करेगा l अपने आपको इस तरह निर्माण कीजिये की लोग आपकी वजह से नहीं आपके लिए बेचैन रहे और आपको उनके उस बर्ताव से कोई प्रभाव पड़े

प्यार रिश्ते को मजबूती प्रदान करता है  l परन्तु मोह इंसान को हमेशा से कमजोर  बनाता आया है l 

हर पिता को अपने पुत्र से प्रेम होता है और वो चाहता है की वो अपने जीवन में एक सफल और सच्चा नागरिक बने, परन्तु यदि उसे मोह हो  जाए तो वह अपने पुत्र का त्याग नहीं कर पाएगा और फिर वो बालक न तो किसी विद्यालय में जा सकेगा और न ही अन्य कुशलताओ में निपुण हो सकेगा l अगर आप किसी का भला चाहते है , उसके व्यक्तित्व को निखारना चाहते है तो एक दायरे में रहकर कीजिये तभी आप सफल हो सकेंगे l जिस दिन आप उसके मोहवश हो जायेंगे यकीनन उसके साथ -साथ आप भी अपने आपको शुन्य कर लेंगे l 

फिर भी अगर आप उस इन्सान के बगैर चिंतित है, तो एक बार अपने आपको आइने में देखकर स्वयं से प्रश्न कीजिये क्या आपकी कीमत बस इतनी सी है की कोई भी आपका मालिक बन जाये l

अपने आपको अकेला कर लीजिये, और फिर देखिये समय का चक्र कैसे आपके अनुरूप काम करना शुरू करता है l 

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दोस्त – जो हर कीमत पर आपको सुरक्षित रखे

हम सब किसी न किसी के साथ जुड़े होते है चाहे वो प्यार का रिश्ता हो, दोस्ती का हो या किसी विशेष कारण से ही एक हुए हो |

इन सबमे एक ऐसा भी होता है जिस पर हम जान छिडकते है  किसी भी कीमत पर उसका बुरा नहीं होने देते |

लेकिन कभी कभी ऐसी स्थिति आ जाती है की हमारा वो दोस्त किसी गलत रास्ते पर निकल पड़ता है,  या कोई गलत निर्णय लेता है |तो उस स्थिति में हमें हर कीमत पर उसे रोकना चाहिए |

हो सकता है की उस समय उसके लिये वो रास्ता या वो वस्तु या अमुक इन्सान ज्यादा मायने रखता हो जिसके प्रति उसका लगाव बढ़ रहा है , और वो आपकी एक भी बात का समर्थन नहीं करेगा |

उस समय उसे आपकी हर बात निरर्थक लगेगी, और आप जो की उसके भले के लिए सोच रहे है सबसे बड़े शत्रु के रूप में दिखाई देंगे तो अब क्या ? क्या आपको उसे उसके हालत पर छोड़ देना चाहिए ? नहीं ! अगर आपने ऐसा किया तो उसे और बल मिलेगा की वही सही था और उसका निर्णय कभी गलत नहीं हो सकता |

हां, यह भी हो सकता है की वो आपको भला बुरा भी बोल दे जो आपके हृदय को आघात करे और क्रोध वश आप उसे हमेशा के लिए अकेला छोड़ दे |

लेकिन जरा सोचिये क्या यह उचित होगा ?

उदाहरण  के लिए  – आपका कोई छोटा बच्चा है और वो बार बार दीपक को पकड़ने की कोशिस करता  है तो आप उसे मना करते है | एक बार,  दो बार या तीन बार लेकिन अगर फिर भी  वो जिद करता है तो आप यह कहकर छोड़ देते है जा पकड ले , जब जलेगा तब पता चलेगा |

अब यहाँ पर दो बाते है जो आपको समझनी चाहिए पहला यह की आपने बच्चे को कई बार मना किया लेकिन वो नहीं माना इसलिए आपने उसे अपनी मनमर्जी करने दिया |

दूसरा यह की आप जानते है की उस दीपक से उसे ज्यादा नुकसान नहीं होगा और उसे सबक भी मिल जायेगा ताकि भविष्य में वो दुबारा गलती नहीं करेगा |

लेकिन जरा सोचिये अगर दीपक की जगह कोई आग का ढेर हो तो क्या तब भी आप उसे जाने देंगे …. चाहे आपके बीसियों बार मना करने के बावजूद वो जिद कर रहा हो , कदाचित नहीं |  फिर चाहे आपको उसे थप्पड़ ही क्यों न मारना पड़े लेकिन किसी भी कीमत पर उसे आग के पास नहीं जाने देंगे  | शायद आप उसे कमरे में बंद भी कर देंगे जब तक की वो आग खुद शांत न हो जाये या उसे आपको शांत करना पड़े |

आप ऐसा इसलिए करेंगे , क्योकि आपको पता है की दीपक से जलकर तो सबक मिल सकता है लेकिन आग के ढेर से वापसी का कोई रास्ता नहीं है |  

जिस तरह बच्चे को उस दीपक में या आग के ढेर में कोई खतरा नहीं दिखाई देता वो तो उसे चमकदार और आकर्षण लगता है, ठीक उसी तरह से आपके उस दोस्त को वास्तविक  खतरे का आभास नहीं है |

अब  क्या आप चाहेंगे की आपके दोस्त का भविष्य खतरे में पड़े या ऐसी परस्थिति उत्पन्न हो जाये और ऐसे मझधार में फंस जाये जहाँ से चाहकर भी वो  वापिस ही न आ पाए ……………………

कदाचित आप ऐसा नही चाहेंगे  , इसलिए आपका कर्तव्य बनता है  की उसे उस गलत निर्णय के लिए रोके चाहे उसके लिए किसी भी सीमा तक जाना पड़े |

अगर आप उसमे सफल हो गए तो हो सकता है की वो आपसे दूरिया बना ले, लेकिन इसमें चिंता की कोई बात नहीं |

कम से कम उसकी जिन्दगी बर्बाद होने से  तो बच गयी |

और यकीन मानिये एक न एक दिन वो तुम्हारे पास वापस जरुर आयेगा जब उसे सच्चाई का आभास होगा |

इसलिए अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा है तो बिना सोचे समझे निर्णय लीजिये उससे पहले की देर हो जाये, और आपके पास पश्चाताप और खुद को दिलासा देने के सिवाय कुछ भी न रहे |

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ऐ मुसाफिर आज तू, फिर से अकेला हो गया

ऐ मुसाफिर आज तू, फिर से अकेला हो गया I

महफिलों की बात क्या, एकांत में ही खो गया II  

क्यों बहकता है तू बन्दे, सुनके दो मीठे बोल के ,

छोड़ जाते है तुम्हारे, जीवन में विष घोल के I

जो जगाई आस थी विश्वास की दिल में उसे,

जो मिला  हमदर्द बनके,  दर्द देकर खो गया I

ऐ मुसाफिर आज तू,  फिर से अकेला हो गया II

चेहरे पर मुस्कान तेरे, रहते थे हर पल कभी ,

साथ तेरे रहने से, गम भूल जाते थे सभी I

दिल लगाके तूने फिर क्यों, ऐसी गलती कर डाली ,

उम्र भर आंखे न भीगी, एक पल में रो गया II

ऐ मुसाफिर आज तू, फिर से अकेला हो गया

महफिलों की बात क्या एकांत में भी खो गया II

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