December 2022

चेहरा – ( दाग चहरे पर नहीं दिल में है) 

चेहरा – ( दाग चहरे पर नहीं दिल में है)

(पात्र – सिद्धांत- २५ साल, मुस्कान- २२ साल, बिक्रांत- २५ साल, सार्थक- ३५ साल )

दृश्य- १

एक लड़का और लड़की स्कूटी से जा रहे है, दोनों बहुत खुश लग रहे है आपस में बाते करते हुए हंस रहे है I

इतने में सामने से एक लड़का इशारा करता है,  लड़की पलट कर देखती है जो उसका कोई पुराना दोस्त होता है I

लड़की स्कूटी चला रहे लड़के से बोलती है I

लड़की- अरे सिद्धांत  उधर देखो मेरा पुराना दोस्त है, स्कूटी घुमाओ जल्दी I

और इसी हडबडाहट में स्कूटी  टकरा जाती है ,  लडकी तो बच  जाती है पर लड़के के मुंह  पर चोट  लग जाती है I

बगल से एक और युवक जा रहा होता है थोड़े से फटेहाल में है , एक्सीडेंट देखकर रुक जाता है I

युवक – अरे जल्दी से इन्हें हास्पिटल ले चलो , खून ज्यादा बह रहा है I

फिर सभी उसे हॉस्पिटल लेकर चले जाते है I

दृश्य - २

सिद्धांत,  जिस लडके  को चोट लगी थी बिस्तर पर लेटा हुआ है उसके चेहरे पर ज्यादा चोट लगने के कारण चेहरे पर दाग आ गया है I

इतने में लड़की उसी पुराने दोस्त के साथ उससे मिलने आती है उसके चेहरे पर दाग देखकर थोडा चौंकती है लेकिन खुद को सम्भाल  लेती है

मुस्कान – ये दाग अभी तक ……  डाक्टर ने क्या बोला … ये ठीक तो हो जायेगा न ?

सिद्धांत – शायद नहीं होगा , डाक्टर साहब कह रहे थे की दाग ऐसा ही रहेगा अगर ठीक करना है तो प्लास्टिक सर्जरी करवानी पड़ेगी I और तुम तो जानती ही हो की इतनी महंगी सर्जरी मैं करा नहीं सकता I

मुस्कान – मन ही मन तेरी औकात ही इतनी कहाँ I

सिद्धांत – तुम कुछ कह रही हो शायद I

मुस्कान – (हडबडाते हुए) नहीं कुछ नहीं I तुम जल्दी ठीक हो जाओगे I

बिक्रांत (लड़की का दूसरा दोस्त)  – अब चलते है हमें देर हो रही हैI तुम्हारे दुकान का कागज भी सही करवाना है I

 सिद्धांत –क्या  बात बात है मुस्कान, कुछ दिक्कत है क्या ?

मुस्कान- नहीं कुछ नहीं तुम आराम करो I बिक्रांत है न ! सब संभाल लेगा I

मुस्कान , बिक्रांत का हाथ पकड़कर वंहा से चली जाती है I

 

सिद्धांत उसे जाते हुए देखता है , फिर बगल में रखी किताब पढने लगता है I

दृश्य - ३

सिद्धांत कुर्सी पर बैठकर किताब पढ़ रहा होता है इतने में फोन की घंटी बजती है I

सिद्धांत- हैलो (उधर से एक लड़की की आवाज आती है )- अरे मुस्कान तुम …. कैसी हो I

मुस्कान और उसका दोस्त बिक्रांत दोनों बाइक पर होते है I

मुस्कान- सिद्धांत मैं कुछ कहना चाहती थी, वो मै ……मै …… तुम्हारे साथ ..

सिद्धांत- बोलो क्या बात  है , रुक क्यों गयी ?

(उधर बिक्रांत बोलता है उससे पूछ उसका चेहरा कैसा है अब)

मुस्कान- तुम्हारा फेश कैसा है अब, दाग सही तो नहीं हुए होंगे ?

सिद्धांत- नहीं, मैंने तो बताया तो था की सर्जरी से सही हो जायेगा I

मुस्कान- हां मालुम है और वो कभी नहीं होगा, तो मै……. मैं  नहीं चाहती की कल को अगर मैं तुम्हे किसी से मिलवाऊ तो लोग पता नही क्या कहेंगे

सिद्धांत- क्या – क्या? मैं  समझा नहीं ?

बिक्रांत ,( मुस्कान के हाथ से मोबाइल छीन लेता है)- सुन भाई अब मुस्कान तेरे साथ नहीं रह सकती , कुछ दिनों बाद हम शादी कर रहे है I अब तू उसे हमेशा के लिए भूल जाना I और फ़ोन काट देता है I

सिद्धांत थोडा मायूस हो जाता है लेकिन फिर किताब पढने लगता है I 

दृश्य- ४

दफ्तर का दृश्य है I एक क्लर्क बाहर बैठा कुछ काम कर रहा है I

इतने में बिक्रांत और मुस्कान उस आफिस के सामने आते है I उनके हाथ में कुछ पेपर है I दोनों बहुत परेशान लग रहे है I

मुस्कान- हमें साहब से मिलना है बहुत अर्जेंट है I

क्लर्क  – आपके पास साहब का अपॉइंटमेंट है क्या ?

बिक्रांत- नहीं हमारे पास नहीं है I

क्लर्क – तो फिर साहब नहीं मिल सकते I एक काम करो अपना पेपर छोड़ जाओ और नाम और नम्बर भी, मैं आपको एक दो दिन में बुला लुंगा I

मुस्कान- नहीं हमें बहुत जरूरी है , अगर साहब ने हस्ताक्षर नहीं किये तो हम सड़क पर आ जायेंगे I हमारा दुकान नीलाम हो जायेगा I

दोनों हाथ जोड़कर गिडगिडाने लगते है I

क्लर्क  – अच्छा रुको मैं देखता हूँ I

(अन्दर बैठा व्यक्ति इनकी बाते सुन लेता है और आवाज देता है , सार्थक उन दोनों को अन्दर ले आओ I

 दोनों अंदर जाते है और चौक जाते है I सामने कुर्सी पर सिद्धांत बैठा होता है I

मुस्कान- तुम और यंहा , इस कुर्सी पर …

सार्थक (क्लर्क ) – मैडम तुम नहीं आप कहो , यही है यहाँ के नए आफिसर I

सिद्धांत- जी हाँ मैं, तुम्हे तो पता ही होगा की मैं UPSC की तयारी कर रहा था I पहले तो मेरे पास समय बहुत कम होता था पढने के लिए , लेकिन  जब तुम मुझे छोड़कर चली गयी तो मैं  पूरी तरह से फ्री हो गया I मैंने पूरा समय पढाई में लगाया और आज इस ओहदे पर पंहुचा गया I

मुस्कान- सॉरी सिद्धांत… मुझे माफ़ कर दो I मैंने तुम्हारे साथ गलत व्यव्हार किया I

और दूसरी तरफ मुस्कराते हुए क्लर्क  को देखकर , तुम तो वही हो न जो उस दिन एक्सीडेंट में हमारी मदद किया था I

सार्थक – हाँ मैं वही हूँ, एक दिन किसी काम से साहब हमारे गावं में आये थे ,मैं बेरोजगार था, साहब ने मेरा हालचाल पूछा और यहाँ  नौकरी दे  दिया I

बिक्रांत – परन्तु आपके चेहरे पर दाग था न ?

सिद्धांत- मैंने सर्जरी करवा लिए, सोचा एक तो चली गयी कही ऐसा न हो की दूसरी मिले ही न और हंसने लगता हैI

इतने में दोनों वापस जाने लगते है , उन्हें वापस जाता देखकर सिद्धांत उन्हें रोकता है I

सिद्धांत- रुको तुम्हारा कोई काम था न, लाओ मैं साइन कर देता हूँ I

मुस्कान उसे पेपर देती है , सिद्धांत पेपर चेक करता है, और वापिस कर देता है I

सिद्धांत- सॉरी मैडम मैं इस पर साइन नहीं कर सकता I ये अवैध है,  हाँ अगर कुछ और सहायता चाहिए तो सार्थक को बोल देना I

दोनों मायूस होकर चले जाते है I

 सिद्धांत कुर्सी पर बैठकर काम करने लगता है और सार्थक बाहर अपनी जगह पर ……………..       


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दोस्ती में सोच संकरा नहीं सकारात्मक रखे

आप दो दोस्त है और एक काफी दिनों से परेशान हो, बहुत संघर्ष
कर रहा  हो, हर छोटी बड़ी बात उसकी तुम्हे पता है I

आप भी उसे सांत्वना  देते रहते हो की सब ठीक हो जायेगा I

फिर कुछ दिन बाद वो सिर्फ अपने बारे में बात करने लगता  है , की उसने ऐसा किया, उसने वैसा किया, आज उसे
एक उपलब्धि मिली है, आगे भी बात चल रही है इत्यादि I

अब आप सोचना शुरू कर  देते है की आपका दोस्त बदल चुका है , हर वक्त
अपने बारे में ही बात करता है , हर छोटी बड़ी उपलब्धियों को गिनवाता रहता है, कुछ
ज्यादा ही उड़ने लगा है, एकदम खुदगर्ज हो चुका है I

परन्तु सच तो ऐसा भी हो सकता है की वो आपके साथ हर छोटी बड़ी
ख़ुशी इसलिए साझा करता है की ताकि आपको लगे की अब उसके संघर्ष वाले दिन ख़त्म होने
वाले है I अब उसकी परेशानी ख़त्म होने वाली है I और ये सब बाते सिर्फ आपके साथ करता
है क्योकि वो सिर्फ आप ही हो जिसे उसके अतीत के बारे में,  सपनो के बारे मे,  हालत और हालात  के बारे में सब कुछ पता है I और आपको यह सब जानकर ख़ुशी होगी क्योकि आप उसके हमदर्द हो, हमसफर हो , आपसे कुछ ऐसा रिश्ता है
जिसे बयाँ नही किया जाता I

अब सोचना आपको है की आप इन बातो को किस  दृष्टिकोण से देखते है I 


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पिता ही परम-पिता

तू मंदिर मंदिर भटक रहा , जिस प्रभु का करने को नमन I
इक भगवान है भूखा बैठा , जिसने दी है तुझको जीवन II
चढ़ा रहा फल फूल  मिठाई, धूप  नैवेद्य  करता अर्पण I
एक बूंद प्यास को तरस रहा, तेरे खातिर सब किया समर्पण II
अपने सपने पाने की खातिर, घुटने टेक करता विनती I
उसने तुझ पर कुर्बान किये, निज सपनों की न कोई गिनती II
इस पिता की आज्ञा से रामचंद्र, नर से नारायण तुल्य हुए I
पितृ भक्ति से न जाने कितने, सादे जीवन बहुमूल्य हुए II
जिस प्यार भाव से ऐ  बंदे, उस प्रभु का तू करता गुणगान I
बस एक बार दिल से पुकार, उस पिता को भी देकर सम्मान II
जो अब तक तुझको नही मिला, सच मान वो सब मिल जायेगा I
जो पूरा न कर सके  देवी देवता,  इक आशीर्वाद कर जायेगा II

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राज और राजदार – एक हद तक सीमित रखे

राज

हम सबकी जिन्दगी में कोई न कोई राज जरूर होते है अगर किसी कारणवश वो  सबके सामने आ जाये तो हो सकता है की आपकी जिन्दगी में कोई भी अनहोनी हो जाये

कुछ राज सकारात्मक भी हो सकते है लेकिन अधिकतर नकारात्मक ही होते है इसलिए तो उन्हें राज रखना पड़ता है

हम सबकी जिन्दगी में जाने अनजाने ऐसी घटनाये घट जाती है या कुछ ऐसा कर जाते है जिन्हें सोचकर बाद में पछतावा ही होता है

ये आपके साथ घटी हुई कोई घटना हो सकती है , या आपके द्वारा की गयी कोई भूल.

राजदार

अब चूकि कोई न कोई राज होने कारण एक राजदार भी होता है  जिसे आपसे ज्यादा आपके बारे में पता होता है I

हम अपनी छोटी बड़ी सारी बाते उसके साथ साझा करते है I लेकिन एक समय ऐसा भी आ जाता है जब दोनों के रास्ते अलग अलग हो जाते है I चाहे वो व्यक्तिगत हो या व्यावसायिक कारणों से I ऐसे में हमारे मन में एक ही शंका उठती है की क्या वो भी उस राज को राज रख पायेगा जो सिर्फ और सिर्फ उसे ही पता है I अगर कही उसने किसी के सामने उसे व्यक्त कर दिया तो मेरी इज्जत भी जा सकती है,   हमारी सारी  छबि धूमिल हो सकती है I अब इस हालात में हम  कुछ भी करने या न करने की स्थिति में रहते है I इसलिए जितना संभव हो सके किसी राजदार से तो दूर रहे , लेकिन अगर है तो कोशिश करे की उसके साथ एक दायरा बना कर रखे I

तो क्या हमें अपने राज किसी को बताने नहीं चाहिए ?

नहीं, मै  तो यही जनता हूँ की हर इंसान  से कोई न कोई भूल अवश्य हो जाती है,  और कुछ न कुछ अनचाही  घटनाये भी हो जाती है I आपको चाहिए की जितना संभव हो अपने राज अपने तक ही सीमित रखे I क्योकि  उसके उजागर होने से आपकी इज्जत दावं पर भी लग सकती हैI वो आपकी कोई भूल भी हो सकती है I लेकिन समय के साथ हर बड़ी छोटी घटनाएं ढक जाती है I

अब हमें खुदको सबके सामने कैसे प्रस्तुत करना है  ये सिर्फ आपके विचार पर निभर है

क्या पति-पत्नी के बीच में राज रहना चाहिए ?

मेरे एक दोस्त ने मुझसे कहा की वो अपनी पत्नी को बेहद प्यार करता था I एक दिन बातो ही बातो में उसने वो सब बता दिए जो की उसकी नजर में महज एक भूल थी लेकिन  उस घटना के बाद दोनों के बीच में तनाव उत्पन्न हो गया I मैं  यह नहीं कहता की अपने जीवनसाथी से कोई बात छुपा कर रखो.मैं इतना जरूर कहना चाहूँगा की जिस बात को राज रखने में ही परिवार की भलाई हो उसे राज ही रहने दे तो जीवन आसान  रहती है I  शादी से पहले की जिन्दगी में दोनों के कुछ राज जरूर होते है अब उन बातो को आगे लाने का कोई औचित्य नहीं है I

कोशश करे की पुनः ऐसी कोई भूल न हो जाये जिससे एक दुसरे से नजर न मिला पाए . इस लिए बीती हुई बातो पर पर्दा डालने में ही भलाई है


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प्यार एक प्रसाद है​

प्यार कोई सस्ती चीज़ नहीं जो यूँ ही लोग बांटते रहे, और इतनी महंगी भी नहीं की किसी को मिल भी न सके I

प्यार एक पूजा है, और एक उचित समय तक पूजा करने के बाद ही प्यार का प्रसाद मिल सकता है I

अब प्रसाद देने वाले के ऊपर निर्भर करता है की वो आपको किस मात्रा  में दे, अगर कम मिलता है तो भी हमें निराश नहीं होना चाहिए I कभी कभी हम प्रसाद को दोबारा मांगने की भी चेष्टा करते है, तो कभी मिल जाता है और ज्यादातर नहीं मिलता है I हमें इस बात से निराश नहीं होना चाहिए , बल्कि खुश होना चाहिए क्योकि किसी किसी के नसीब में तो इतना भी नहीं है I

अब आपकी लगन और निष्ठा पर निभर है की आपका प्यार कब तक स्थायी रहता है क्योकि प्यार पाने वालों की क़तार बहुत लम्बी है I जिन्दगी में सब कुछ आसानी से नहीं मिलता है, हमें लगातार कोशिश करते रहना चाहिए I 

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