जो कभी हर मुस्कान पर मरते थे
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प्यार अगर वरदान है तो वही मोह अभिशाप बन जाता है l किसी भी इंसान का अपनी परिस्थिति के वश में हो जाना और उसके अनुसार आचरण करना तो उसकी विवशता हो जाती है l परन्तु यदि आप किसी के मोह वश हो जाये और आपकी हंसी , आपका आनंद, आपका चैन दूसरे की बर्ताव पर निर्भर करे तो यकीन मानिये आप उसके पूर्णतया अधीन हो चुके है l आपके मस्तिष्क पर उस इंसान का नियंत्रण हो चुका है l और आपकी मनोदशा विक्षिप्त हो चुकी है l हर पल, हर घडी , प्रत्येक स्थिति में आप उसी का चिंतन कर रहे होते है l
आप अपना महत्व खत्म कर चुके है , अब आपकी गुणवत्ता एक निमित्त मात्र रह गयी है l
जिस तरह से एक कठपुतली का नृत्य दिखाने वाला मदारी का सम्पूर्ण नियंत्रण उसके कठपुतली पर होता है , वो जिस दिशा में चाहे , जिस कोण से चाहे उसे नचा सकता है , उससे जो भी भाव प्रकट करना चाहे या वाक्य कहना चाहे , वो सब कर सकता है l आपकी स्थिति भी एक कठपुतली की तरह हो जाती है l
फिर भी आप किसी के मोहवश में हो चुके है तो कठपुतली की जगह बुत बनना उचित रहेगा l आपको मौन धारण कर लेना चाहिए , और एक तरह से अपने आपको उसके सम्मुख निष्क्रिय बना देना चाहिए l ऐसी स्थिति में न तो आपके उपर किसी तरह का मानसिक दबाव रहेगा और न ही कोई दूसरा आपको अपने इशारे पर नचाने की चेष्टा करेगा l अपने आपको इस तरह निर्माण कीजिये की लोग आपकी वजह से नहीं आपके लिए बेचैन रहे और आपको उनके उस बर्ताव से कोई प्रभाव पड़े l
प्यार रिश्ते को मजबूती प्रदान करता है l परन्तु मोह इंसान को हमेशा से कमजोर बनाता आया है l
हर पिता को अपने पुत्र से प्रेम होता है और वो चाहता है की वो अपने जीवन में एक सफल और सच्चा नागरिक बने, परन्तु यदि उसे मोह हो जाए तो वह अपने पुत्र का त्याग नहीं कर पाएगा और फिर वो बालक न तो किसी विद्यालय में जा सकेगा और न ही अन्य कुशलताओ में निपुण हो सकेगा l अगर आप किसी का भला चाहते है , उसके व्यक्तित्व को निखारना चाहते है तो एक दायरे में रहकर कीजिये तभी आप सफल हो सकेंगे l जिस दिन आप उसके मोहवश हो जायेंगे यकीनन उसके साथ -साथ आप भी अपने आपको शुन्य कर लेंगे l
फिर भी अगर आप उस इन्सान के बगैर चिंतित है, तो एक बार अपने आपको आइने में देखकर स्वयं से प्रश्न कीजिये क्या आपकी कीमत बस इतनी सी है की कोई भी आपका मालिक बन जाये l
अपने आपको अकेला कर लीजिये, और फिर देखिये समय का चक्र कैसे आपके अनुरूप काम करना शुरू करता है l
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हम सब किसी न किसी के साथ जुड़े होते है | चाहे वो प्यार का रिश्ता हो, दोस्ती का हो या किसी विशेष कारण से ही एक हुए हो |
इन सबमे एक ऐसा भी होता है जिस पर हम जान छिडकते है किसी भी कीमत पर उसका बुरा नहीं होने देते |
लेकिन कभी कभी ऐसी स्थिति आ जाती है की हमारा वो दोस्त किसी गलत रास्ते पर निकल पड़ता है, या कोई गलत निर्णय लेता है |तो उस स्थिति में हमें हर कीमत पर उसे रोकना चाहिए |
हो सकता है की उस समय उसके लिये वो रास्ता या वो वस्तु या अमुक इन्सान ज्यादा मायने रखता हो जिसके प्रति उसका लगाव बढ़ रहा है , और वो आपकी एक भी बात का समर्थन नहीं करेगा |
उस समय उसे आपकी हर बात निरर्थक लगेगी, और आप जो की उसके भले के लिए सोच रहे है सबसे बड़े शत्रु के रूप में दिखाई देंगे | तो अब क्या ? क्या आपको उसे उसके हालत पर छोड़ देना चाहिए ? नहीं ! अगर आपने ऐसा किया तो उसे और बल मिलेगा की वही सही था और उसका निर्णय कभी गलत नहीं हो सकता |
हां, यह भी हो सकता है की वो आपको भला बुरा भी बोल दे जो आपके हृदय को आघात करे और क्रोध वश आप उसे हमेशा के लिए अकेला छोड़ दे |
लेकिन जरा सोचिये क्या यह उचित होगा ?
उदाहरण के लिए – आपका कोई छोटा बच्चा है और वो बार बार दीपक को पकड़ने की कोशिस करता है तो आप उसे मना करते है | एक बार, दो बार या तीन बार लेकिन अगर फिर भी वो जिद करता है तो आप यह कहकर छोड़ देते है जा पकड ले , जब जलेगा तब पता चलेगा |
अब यहाँ पर दो बाते है जो आपको समझनी चाहिए पहला यह की आपने बच्चे को कई बार मना किया लेकिन वो नहीं माना इसलिए आपने उसे अपनी मनमर्जी करने दिया |
दूसरा यह की आप जानते है की उस दीपक से उसे ज्यादा नुकसान नहीं होगा और उसे सबक भी मिल जायेगा ताकि भविष्य में वो दुबारा गलती नहीं करेगा |
लेकिन जरा सोचिये अगर दीपक की जगह कोई आग का ढेर हो तो क्या तब भी आप उसे जाने देंगे …. चाहे आपके बीसियों बार मना करने के बावजूद वो जिद कर रहा हो , कदाचित नहीं | फिर चाहे आपको उसे थप्पड़ ही क्यों न मारना पड़े लेकिन किसी भी कीमत पर उसे आग के पास नहीं जाने देंगे | शायद आप उसे कमरे में बंद भी कर देंगे जब तक की वो आग खुद शांत न हो जाये या उसे आपको शांत करना पड़े |
आप ऐसा इसलिए करेंगे , क्योकि आपको पता है की दीपक से जलकर तो सबक मिल सकता है लेकिन आग के ढेर से वापसी का कोई रास्ता नहीं है |
जिस तरह बच्चे को उस दीपक में या आग के ढेर में कोई खतरा नहीं दिखाई देता वो तो उसे चमकदार और आकर्षण लगता है, ठीक उसी तरह से आपके उस दोस्त को वास्तविक खतरे का आभास नहीं है |
अब क्या आप चाहेंगे की आपके दोस्त का भविष्य खतरे में पड़े या ऐसी परस्थिति उत्पन्न हो जाये और ऐसे मझधार में फंस जाये जहाँ से चाहकर भी वो वापिस ही न आ पाए ……………………
कदाचित आप ऐसा नही चाहेंगे , इसलिए आपका कर्तव्य बनता है की उसे उस गलत निर्णय के लिए रोके चाहे उसके लिए किसी भी सीमा तक जाना पड़े |
अगर आप उसमे सफल हो गए तो हो सकता है की वो आपसे दूरिया बना ले, लेकिन इसमें चिंता की कोई बात नहीं |
कम से कम उसकी जिन्दगी बर्बाद होने से तो बच गयी |
और यकीन मानिये एक न एक दिन वो तुम्हारे पास वापस जरुर आयेगा जब उसे सच्चाई का आभास होगा |
इसलिए अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा है तो बिना सोचे समझे निर्णय लीजिये उससे पहले की देर हो जाये, और आपके पास पश्चाताप और खुद को दिलासा देने के सिवाय कुछ भी न रहे |
दोस्त – जो हर कीमत पर आपको सुरक्षित रखे Read More »
ऐ मुसाफिर आज तू, फिर से अकेला हो गया I
महफिलों की बात क्या, एकांत में ही खो गया II
क्यों बहकता है तू बन्दे, सुनके दो मीठे बोल के ,
छोड़ जाते है तुम्हारे, जीवन में विष घोल के I
जो जगाई आस थी विश्वास की दिल में उसे,
जो मिला हमदर्द बनके, दर्द देकर खो गया I
ऐ मुसाफिर आज तू, फिर से अकेला हो गया II
चेहरे पर मुस्कान तेरे, रहते थे हर पल कभी ,
साथ तेरे रहने से, गम भूल जाते थे सभी I
दिल लगाके तूने फिर क्यों, ऐसी गलती कर डाली ,
उम्र भर आंखे न भीगी, एक पल में रो गया II
ऐ मुसाफिर आज तू, फिर से अकेला हो गया
महफिलों की बात क्या एकांत में भी खो गया II
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देखते देखते अश्क बहने लगे
ये मुलाकात कैसी है मेरे सनम
जख्म दिल के मेरे रोके कहने लगे।।
देखते देखते ………………..
तुमको क्या है पता कैसे जीता हूँ मै
याद में तेरी अश्को को पीता हूँ मैं
क्या कमी थी मोहब्बत में मेरे बता
लोग क्यों बेवफा मुझको कहने लगे।।
देखते देखते……………………
तेरी आँखों में जब मेरी तस्वीर थी
कितनी अच्छी भली अपनी तकदीर थी
दिल दुखा करके तुमको मजा क्या मिला
जिन्दगी मेरी मुझपे ही हंसने लगे।।
देखते देखते ………………..
गम जुदाई का बर्दाश्त होता नहीं
इस जमाने पे मुझको भरोसा नहीं
अब बता मुझको जीने से क्या फायदा
जिस्म से जान अब तो निकलने लगे।।
देखते देखते अश्क बहने लगे
ये मुलाकात कैसी है मेरे सनम
जख्म दिल के मेरे रोके कहने लगे।।
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आज की रात सिर्फ और मुझे जीना है I
जाम बोतल से नहीं आँखों से पीना है II
बहुत रुसवाई, मिलन जुदाई हो चुके है ,
जाने कितने पल खुशियों के खो चुके है I
खाते थे एक दूजे पर मरने मिटने की कसमे,
फिर भी जाने कितनी दफा बेवजह रो चुके है I
मेरे सिवा भी जाने कितनो की वो हसीना है ,
आज की रात सिर्फ और मुझे जीना है II
जाम बोतल से नहीं आँखों से पीना है II
वो बेवकूफी भरी मेरी जो हालात थी,
याद आती है वो जो पहली मुलाकात थी I
उसके हुश्न और सादगी पर मर मिटा था ,
लुट चुकी उस पर मेरी हर जज्बात थी I
खत्म हो चुकी तुझसे मेरी हर तमन्ना है ,
आज की रात सिर्फ और मुझे जीना है II
जाम बोतल से नहीं आँखों से पीना है II
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वो लम्हा अब भी मुझे याद आता है II
वो पहली बार जब तुमसे नजरे मिली थी
मानो क्यारी की हर इक कलिया खिली थी
मन मेरा उमंगो से भर उठा था
दिल की धड़कने तेज हो गयी थी
इक टक देखता ही रह गया था
मेरी चेतना जाने कहाँ खो गयी थी
पल पल की वो याद अब भी सताता है I
वो लम्हा अब भी मुझे याद आता है II
कुछ दिन हो चले थे
कुछ शिकवे तो कुछ गिले थे
रहते थे साथ हरदम
जैसे कब के बिछड़े मिले थे
उसकी मुस्कराने की अदाये
खुशबू से भर जाती थी फिजाये
मै मदहोश हो चला था
कुछ यूँ ही सिलसिला था
वो खुशबू अब भी सांसो में समां जाता है I
वो लम्हा अब भी मुझे याद आता है II
उसका रोज मन्दिर में पूजा करना
नजरे बचाकर मुझे देखा करना
टीका लगाती बड़े प्यार से
फिर छूकर भी अनदेखा करना
मेरी हर बातो का समर्थन करती
घंटो बैठकर जाने क्या मंथन करती
फिर इक दिन कुछ ऐसा लम्हा आया
न बीतने वाला तन्हा मौसम लाया
रह रहकर मुझे तडपा जाता है I
वो लम्हा अब भी मुझे याद आता है II
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5/5
एक पति-पत्नी कच्चे मकान में रह रहे है, थोड़ी नोक झोक के साथ उनकी दिनचर्या चल रही है I अब सुनते है उनकी इसी रोज- रोज की नोंक झोंक की एक झलक –
पत्नी- सुनते हो जी
पति – मै तो बहरा हूँ जी ।
पत्नी- आप तो बुरा मान गए ।
पति- हम आप की चाल जान गये ।
पत्री- आज क्या खाओगे , जो कहो वो बनाऊ ।
पति- मै मुर्ख हूँ जो आपनी मनपसन्द चीज बताऊ ।
पत्नी- ऐसे क्यों कहते हो , मैंने कब की है अपनी मनमर्जी ।
पति – करोगी जो तेरे मन में है, फिर मै क्यों लगाऊ अर्जी ।
पत्नी- मेरे पास आओ अब दूर न जाओ, खूब सेवा करुँगी तुम्हारी ।
पति – मैं जानता हूँ खूब पहचानता हूँ, क्या मेरी मति गई है मारी ।
पत्नी – आ भी जाओ काम बहुत है , कुछ तुम करो कुछ मैं करू ।
पति- यह सब तेरी जिम्मेदारी है , बेवजह ही मैं क्यों मरूं ।
पत्नी- मरे आपके दुश्मन , कुछ अच्छा खाने को है मेरा मन ।
पति- लाला के यहाँ से कुछ मँगा ले, जो मर्जी है बनाले ।
पत्नी- लाला का बहुत उधार है, हमेशा पैसे ही मांगता है ।
पति- किसी का उधार हमने दिया है, क्या वो नहीं जानता है ।
पत्नी – इतना भी अच्छा नहीं होता, कर्जा चुका देना चाहिए ।
पति- तो जल्दी से मायके से अपने कुछ रूपये लेकर आईये ।
पत्नी- आप बात – बात पर मेरे मायके को मत लाया करो ।
ये सब कहना व्यर्थ है , हमेशा न सताया करो ।।
पति – मैंने तुझे कब कब सताया है, झूठ कहते तुझे शर्म नहीं आती ।
मैं तेरे मायके को नहीं लाता, पर तू मेरे बाप पर जरुर है जाती ।।
पत्नी – वैसे तो मैं आपकी धर्मपत्नी हूँ , अर्धान्ग्निनी हूँ , सहभागिनी हूँ ।
नाम भी महालक्ष्मी रखा है, पर इस घर में अभागिनी हूँ ।।
पति- तू तो फिर भी भाग्यशाली है जो मेरे जैसा पति मिला है ।
वर्ना मुझे पता है मायके में तेरा क्या क्या गुल खिला है ।।
पत्नी- ये सब कहते शर्म नहीं आती, मुझ पर इल्जाम लगाते हो ।
खुद निकम्मे घर पर बैठकर जाने क्या क्या गुल खिलाते हो ।।
पति – अपने पति को निकम्मा कहते हुए तेरी जुबान नहीं कटती है।
इतना ही बुरा हूँ अगर तो मुझसे ही सदा क्यों सटती है ।।
पत्नी – इस तरह से ताने यू हमको न मारो ।
तुम्ही मेरे देवदास मै तुम्हारी पारो ।।
पति – तुम्हारी इसी अदा पर तो हम मरते है ।
सच कहे हम सिर्फ तुमसे प्यार करते है ।।
पत्नी – छोडो इन बातो को कहो क्या बनाऊ ।
पति – पहले लाला से कुछ सामान उधार ले आऊ ।
इसी तरह से दोनों पति पत्नी ख़ुशी से रहते है ।
सिर्फ मन बहलाने के लिए ही झगड़ा करते है ।
पति-पत्नी नोंक – झोंक वाली कविता Read More »
हर इन्सान को जिन्दगी में एक बार प्यार जरूर करना चाहिए Iप्यार होने के बाद आपको सभी भावनाओ, दर्द, एहसास, ऐतबार, इन्तजार, बेवफाई –रुसवाई, इर्ष्या, चिडचिडाहट ना जाने कितने ऐसे चीजो का मतलब समझ में आ जाता है जो वर्षो तक अध्ययन करने के बाद भी बड़े बड़े विद्वानों को समझ में नहीं आती I
एक एक पल का इंतजार कितना भारी महसूस होता है, शायद ही कोई समय का पावंद व्यक्ति समझ सके I हर बात को सोच समझ कर बोलना पड़ता है, कही उसके प्रेमी या प्रेमिका को बुरा न लग जाये I अपने और उसके पसंद नपसंद का ख्याल करना बहुत कुछ सिखा जाता है I
अगर आप खुशकिश्मत हुए तो आपका प्यार सफल हो जायेगा, फिर हर चीज आपको आसान लगने लगती है I फिर जिन्दगी
में बड़ी से बड़ी चीजो को हासिल करना आपका जुनून बन जाता है I
लेकिन अगर आपका प्यार सफल नहीं होता है या प्यार में धोखा मिलता है जो अक्सर मिलता ही रहता है I ऐसी स्थिति में जो एक दुखो का पहाड़ आपके ऊपर गिरता है, अगर उसे आपने संयम से दिल को काबू में रखकर सामान्य कर लिया तो यकींन मानिये जिन्दगी में कभी भी बड़ी से बड़ी मुसीबत के सामने भी आप विचलित नहीं हो सकते I
आप एक ऊँचे मुकाम को हासिल कर सकते है क्योकि अब आपके जज्बात खत्म हो चुके है I किसी के लिए कोई भावना शेष नहीं रह गयी है I अब आपको सिर्फ आपकी मंजिल दिखाई देती है I अब आपकी जिन्दगी में कोई सही-गलत, रोक-टोक करने वाला नहीं रह जाता I फिर एक बार सफल होने के बाद कोई आपको प्यार करने से इंकार कर सके ऐसा शायद ही होगा I
लेकिन अगर फिर भी ऐसा होता है तो अपने आप से प्यार करना सीख लीजिये, फिर किसी के प्यार की जरुरत नहीं पड़ेगी
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तू मंदिर मंदिर भटक रहा , जिस प्रभु का करने को नमन I
इक भगवान है भूखा बैठा , जिसने दी है तुझको जीवन II
चढ़ा रहा फल फूल मिठाई, धूप नैवेद्य करता अर्पण I
एक बूंद प्यास को तरस रहा, तेरे खातिर सब किया समर्पण II
अपने सपने पाने की खातिर, घुटने टेक करता विनती I
उसने तुझ पर कुर्बान किये, निज सपनों की न कोई गिनती II
इस पिता की आज्ञा से रामचंद्र, नर से नारायण तुल्य हुए I
पितृ भक्ति से न जाने कितने, सादे जीवन बहुमूल्य हुए II
जिस प्यार भाव से ऐ बंदे, उस प्रभु का तू करता गुणगान I
बस एक बार दिल से पुकार, उस पिता को भी देकर सम्मान II
जो अब तक तुझको नही मिला, सच मान वो सब मिल जायेगा I
जो पूरा न कर सके देवी देवता, इक आशीर्वाद कर जायेगा II