दादी का प्यार और नौकरी
दृश्य -1
नौकरी और पैसों की दौड़ में कहीं अपने सबसे अनमोल रिश्ते पीछे न छूट जाएँ।आरव कुछ सोच रहा होता है , मैं कितना ही अभागा हूँ या खुदगर्ज हूँ जो सही गलत का फैसला न ले सका , चंद रुपयों की खातिर मैंने रिश्ते को अहमियत नहीं दी और फिर सोच में डूब जाता है
(दादी कुछ अनाज बीन रही है , बहु (शीला ) घर के काम कर रही है एक 7 साल का बच्चा आस पास में खेल रहा है और फिर दादी के पास जाकर जो अनाज बीन रही है उसे मिला देता
है)
दादी – (गुस्से में ) नालायक ये किया सारा किये पर पानी फेर दिया , अब इसे क्या तेरी माँ बीनेगी ,
(बच्चा रोने लगता है ) फिर दादी ही उसे चुप कराती है दुलार करने लगती है .,
शीला – ये दिन पर दिन शैतान होता जा रहा है, स्कूल में नाम लिखा दिया है लेकिन खेलने के आगे कभी पढाई नहीं करता .
आरव (बच्चा) – मम्मी अभी खेलने दो बाद में पढ़ लूँगा न ( और दादी का चश्मा उतारकर पहन लेता है और इधर उधर भागने लगता है लेकिन वो खम्भे से टकरा जाता है और उसके सर में चोट लग जाती है )
शीला आवाज सुनकर दौड़कर आती है , दादी भी आती है दोनों उसे उठाते है उसके सर से खून निकल रहा होता है, दादी अपना आँचल फाड़कर उसके सिर पर बांधती है ,
दादी– बहु तू अजय को फोन कर के बुला ले लगता है ज्यादा चोट लग गया है, मैं तब तक डाक्टर को बुला कर लाती हूँ
(शीला अजय को फोन लगाने लगती है इतने में दादी डाक्टर को बुलाने भागती है )
अजय आता है , आरव बिस्तर पर लेटा है उसके सिर में पट्टी बंधी है, दादी उसके सिरहाने बैठी हुई है ,
अजय – क्या हुआ शीला इसे चोट कैसे लगी .
शीला – कुछ नहीं वो अपनी दादी का चश्मा पहनकर भाग रहा था तो खम्भे से टकरा गया .
अजय – क्या माँ तुम भी न , पता है ये पावर का चश्मा है तो उसे क्यों पहनने दिया , आखिर फोड़ लिया न सर
दादी – बेटा मैंने कब दिया उसने उतार लिया , तो
अजय – (बात को बीच में काटते हुए ) रोक तो सकती थी न, और शीला तुम्हे तो ख्याल रखना चाहिए था एक बच्चे को सम्भाला नहीं जाता .
(शीला पानी का ग्लास देते हुए, डाक्टर ने बोला है मामूली चोट है दो दिन में ठीक हो जायेगा )
दृश्य -3
रात का समय है अजय और शीला अपने कमरे में सो रहे है , आरव बिस्तर पर लेता है और दादी अभी भी उसके सिरहाने बैठी हुई है
आरव ( करवट लेते हुए ) – मम्मी – मम्मी प्यास लगी है,
दादी – (तुरंत पानी का ग्लास देते हुए ) ले बेटा पानी पे ले .
आरव – मम्मी कहा है ..
दादी – मम्मी पापा सो गए है , दिन भर काम करके थक जाते है न, अब तू भी सो जा , दर्द तो नहीं हो रहा है न
आरव – थोडा थोडा हो रहा है
दादी – सर पर हाथ फेरते हुए , जल्दी ठीक हो जायेगा
दृश्य -4
( आरव बड़ा हो चुका है और शहर में कमाने लगा है )
अजय – (फोन पर ) – हेल्लो बेटा कैसा है
आरव – मैं ठीक हु पापा , आप कैसे है , मम्मी कैसी है
अजय – बेटा हम सब ठीक है , बस तुम्हारी दादी की तबियत ज्यादा ख़राब है , कह रही है आरव को बुला दो
आरव – पापा मै तो आ जाता लेकिन पता है, अभी साल का आखिरी दिन चल रहा है और मेरी सैलरी बढ़ने वाली है , अगर अभी छुट्टी लिया तो मेरा नुक्सान हो जायेगा .
(दादी जो बीमार है और बिस्तर पर लेटी है उसकी आवाज सुनती है , )
दादी – क्या बोला आरव ने
अजय – कुछ नहीं माँ वो आजकल काम ज्यादा है न तो बस
दादी – कोई बात नहीं बेटा शहर में पैसे की बहुत जरुरत पड़ती है ,
दृश्य -5
दादी का शव रखा हुआ है , सभी रो रहे है
अजय – (फोन पर )- हेल्लो आरव बेटा
आरव – नमस्ते पापा ,मैं बहुत खुश हूँ , बॉस ने मेरी सेलरी बढ़ा दी है ,ऑफिस में मेरे काम की तारीफ हो रही है
अजय – हा बेटा , वो तो ठीक है लेकिन मैंने ये बताने के लिए फोन किया है अब तेरी दादी इस दुनिया में नहीं रही, आखिरी समय में वो तुझे याद करती रही
आरव दुखी हो जाता है , उसके आँखों में आंसू भर आता है उसके मुंह से शब्द नहीं निकलते है.
अजय – बेटा अगर आ सकता है तो अंतिम दर्शन के लिए आ जा , हम शाम तक ही शव को लेकर जायेंगे .
आरव- जी पापा मैं आ रहा हूँ मेरे आने तक इंतजार करना ( फोन रखता है और बिलख बिलख कर रोने लगता है )
आजकल हम पैसे और नौकरी में इतने ब्यस्त हो जाते है की हमें रिश्ते की अहमियत कम लगने लगती है , ऐसा हर किसी के साथ होता है , लेकिन सही मायने में हमें अपने रिश्ते को अपने उस वृद्ध हो चुके दादा दादी को यूँ ही नजरअंदाज नहीं करना चाहिए , क्योकि ये वही पेड़ है जिनकी छाया में तुम फलते फूलते रहे .

