मोबाइल ने छीना बचपन – बच्चों की मोबाइल की लत पर एक भावनात्मक सामाजिक कहानी
सीन -1
शाम
का समय है घर के बरामदे में पति पत्नी और उनका एक 8-10 साल का बच्चा है .
तीनो आपस में बहस कर रहे है , पति बच्चे के हाथ से मोबाईल छीनता है और एक थप्पड़ लगाता है ,बच्चा रोने लगता है और मोबाईल उठाकर जमीन पर पटक देता है
फ़्लैश बेक
सुबह का समय है रश्मि टिफिन तैयार कर रही है , रोहित ऑफिस के लिए तैयार हो रहा है
नीचे एक 4-5 साल का बच्चा खेल रहा है और फिर रोने लगता है , रश्मि उसको मोबाईल पकड़ा देती है बच्चा चुप हो जाता है ,
रश्मि –(दीपक को टिफिन पकड़ाते हुए ) अच्छा सुनो शाम को आते हुए पनीर लेते आना, आज आपकी मनपसंद सब्जी बनाउंगी ,
दीपक – (थोडा रोमांटिक होते हुए ) तुम तो जो भी बना दो वही मेरी मनपसंद हो जाती है और उसे किस करने के लिए आगे बढ़ता है
रश्मि – क्या कर रहे हो मुन्ना बड़ा हो गया है सब देख रहा है .
दीपक – अरे जाने मन वो तो मोबाईल में बिजी है , तुम भी न बस
रश्मि हाथो से धक्का देते हुए ठीक है अभी जाओ ……
दीपक चला जाता है , रश्मि घर के कामो में व्यस्त हो जाती है और काफी समय बीत जाता है , बच्चा मोबाइल में विडिओ देख रहा होता है .
घडी की सुई 10 से 12 बजे पर आती है , रश्मि बच्चे के पास जाती है उसे कुछ खाने को देती है – मेरे मुन्ना को भूख लगी होगी , उसके हाथ से मोबाइल लेती है और उसे खिलाने लगती है तभी डोर बेल बजती है. रश्मि जाकर दरवाजा खोलती है ..उसकी पड़ोसन रज्जो घर के अन्दर घुसते हुए –
रज्जो – रश्मि अभी तक तुम्हारा घर का काम पूरा नहीं हुआ क्या
रश्मि – अभी जाकर खत्म हुआ है , सारे बर्तन , कपडे पोछा ….. बहुत सारा काम हो जाता है
रज्जो – अरे तुमने सुना नहीं बगल वाली के घर में काम वाली का न चक्कर –
(तभी मुन्ना रश्मि के पास आता है और कुछ बोलने की कोशिस करता है )
रश्मि – मुन्ना को चुप कराते हुए दूर करती है – हां हां बोल न चक्कर
रज्जो – बगल वाली जो है न उनके पति का चक्कर
(फिर मुन्ना आकर डिस्टर्ब करता है , रश्मि उसे फिर दूर करती है और उसे मोबाइल देकर दूर बिठा देती है )
रज्जो- बगल वाली के पति का चक्कर उसके काम वाली के साथ चल रहा है
(दोनों काफी देर तक गप्पे मारते है , उधर मुन्ना मोबाइल में व्यस्त रहता है ,घडी की सुई 4 बजा रही होती है )
सीन -2
दीपक – आज ऑफिस जाने का मन नहीं है , थोडा सा काम है तो घर से ही कर लूँगा .
रश्मि – ठीक है मैं तब तक सारा काम निपटा देती हूँ
दीपक लैपटाप पर काम करने लगता है , मुन्ना आकर उसकी फ़ाइल को उठाता है ,
दीपक – उसे प्यार से उठाते हुए ,बेटा अभी ये तुम्हारे काम की नहीं है जब काम की होगी न तो हाथ भी नही लगाओगे . (दीपक उसे दूर बिठा देता है )
थोड़ी देर बाद आकर बच्चा फिर डिस्टर्ब करता है , दीपक कुछ गुस्सा होता है फिर उसे मोबाईल पकड़ा देता है
सीन -3
रश्मि घर के बाहर झाड़ू लगा रही होती है , मुन्ना बाहर ही खेल रहा होता है , सामने से रज्जो मटकते हुए आती है ,
रश्मि – क्या बात है रज्जो आज इतनी जल्दी , काम वाम नही था क्या ?
रज्जो – अरे नहीं दीदी आज मेरे पति और सास ससुर किसी काम से बाहर से गये हुए है शाम तक आयेंगे
तो सोचा तुम्हारे घर के चक्कर लगा लेती हु
(तभी मुन्ना रश्मि के पास आकर बैठता है, कुछ बोलता है , रश्मि उसे चुप कराती है )
रश्मि – रज्जो को बिठाते हुए , अरे चक्कर से याद आया पडोसी के चक्कर के बारे बताया नहीं
(मुन्ना पास में रखा फोन उठता है और वंहा से खिसक जाता है )
दोनों फिर गप्पे मारने लगते है
सीन -4
दीपक और रश्मि टेबल पर बैठे होते है , मुन्ना जो अब थोडा सा बड़ा हुआ है वो दूसरे बेड पर बैठा हुआ है – बगल में कापी किताब फैला हुआ है और वो मोबाईल में कुछ देख रहा है )
दीपक- रश्मि से शिकायत के लहजे में – देख रही हो अपने लाडले को सारा दिन मोबाईल में लगा रहता है , कापी किताब तो जैसे काटता है ,
रश्मि – इसमें मेरी क्या गलती है आपके ही दुलार ने उसे सर पर बिठा रखा है
दीपक – आवाज देता है – मुन्ना मुन्ना
(मुन्ना उधर देखता ही नहीं है वो तो मोबाईल में लगा रहता है , रश्मि उसके हाथ से मोबाईल छीनकर टेबल पर रखती है , मुन्ना रोता हुआ आता है और टेबल से मोबाईल उठा लेता है , जिसे देखकर दीपक को गुस्सा आ जाता वो मुन्ना को थप्पड़ लगा देता है , और मुन्ना मोबाईल को जमीन पर पटक देता है )…
सलाह – आज के सामाजिक परिवेश को देखकर सभी पेरेंट्स से यही कहना चाहता हु की अपने बच्चो को मोबाईल की आदत से दूर रखे , उन्हें पूरा समय दे , उनके साथ समय बिताये न की मोबाईल देकर पीछा छुडाये .
इशारों वाला प्यार – ISHARON WALA PYAR
