2026

महंगाई देवता – MEHANGAI DEVATA

महंगाई देवता

 

हे मंहगाई देवता तुमको है प्रणाम ,

इस दुनिया में तुमसे बढ़कर कोई नहीं महान ।

रोज बढ़ाते दाम तुम , जरा न करते देरी,

तुम्हे पूजते वही रात दिन , करते जो हेरा फेरी ।।

रोटी कपड़ा घर का सपना बस केवल अरमान,

इस दुनिया में तुमसे बढ़कर कोई नहीं महान ।।

सब्जी मंडी रो रही , सिसक रहा है गल्ला,

तरस रहा है दूध को देखो हर एक छोटा लल्ला ।

सेव संतरे तड़प उठे , न रहा कोई पहचान,

इस दुनिया में तुमसे बढ़कर कोई नहीं महान ।।

महँगी हुई किताबे कापी, महँगी हुई दवाई,

खर्चे केवल बढ़ रहे है  , बढती नहीं कमाई ।

डीजल पेट्रोल के दाम को सुनकर निकली जाये जान,

इस दुनिया में तुमसे बढ़कर कोई नहीं महान ।।

बेटा देखो खड़ा लाइन में लेने टिकट धुरंधर,

माँ बापू है खड़े हाथ में खाली लिए सिलिंडर ।

सिखा दिया है थोड़े दिन में कैसे जिए इंसान,

इस दुनिया में तुमसे बढ़कर कोई नहीं महान ।।

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तेरी महिमा मैं क्या जानूं – शिव महिमा

तेरी महिमा मैं क्या जानूं – शिव महिमा

शिव महिमा – कवि बीरेंद्र गौतम

तेरी महिमा मैं क्या जानूँ, वो जाने वेद पुरान

तीनो लोक में नहीं मिलेगा तुझसे बड़ा महान

पल में प्रलय कर सकता है तू है प्रलयंकारी

दानी भी न तुझसा कोई जाने दुनिया सारी

झोली ही कम पड़ जाती जिसको तू देता दान

तीनो लोक में नहीं मिलेगा तुझसे बड़ा महान

जब जब संकट आया जग पर तूने ही संहार किया

जल थल नभ का एक ही पल में तूने है उद्धार किया

सारे प्राणी पूजे तुझको देव हो या शैतान

तीनो लोक में नहीं मिलेगा तुझसे बड़ा महान

मैं अज्ञानी नर अभिमानी कभी न तुझको याद करू

विपति पड़े तो उस पल आकर तुझसे ही फरियाद करू

कुछ न सोचे कैसे भी हो कर देता कल्याण

तीनो लोक में नहीं मिलेगा तुझसे बड़ा महान l

 

कवि – बीरेंद्र गौतम ” अकेलानंद” – बस्ती

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