July 2024

पति पत्नी हास्य कविता – पत्नी का आतंक

पति -पत्नी हास्य कविता – पत्नी का आतंक

 

कवि- बीरेंद्र गौतम “अकेलानंद”

तर्ज– आओ बच्चों तुम्हे दिखाएँ  झांकी हिंदुस्तान की

 

आओ किस्सा तुम्हे सुनाये , पतियों के अपमान की

बचना चाहो तो बात सुनो ,  अकेलानंद महान की

“घरवाली की जय बोलो घर वाली की जय ”

आज सुबह ही पत्नी  मेरी बहुत हुई थी गुस्सा,

उसी भाव में उसने मुझको एक लगाया घूसा । घर वाली की जय बोलो -2

घूसा खाकर मै तो मानो खुद में सिमट गया था,

पास में बैठा बेटा मेरा उससे लिपट गया था ।

बेटा  बोला सुन मेरी माँ तूने पापा को क्यों  मारा,

पहले मेरे आंसू पोंछे फिर मम्मी को ललकारा ।।घर वाली की जय बोलो -2

पहले पत्नी  मुस्काई फिर हाथ उठाया चिमटा,

देख नज़ारा बेटा मेरा गोदी में आ सिमटा ।

अभी तलक जो कुछ थी ठंडी, अब बन गयी थी चंडी,

हम दोनों ऐसे चिल्लाये जैसे हो सब्जी मंडी ।। घर वाली की जय बोलो -2

हाथ जोड़कर मैंने पूंछा मेरी क्या गलती है,

केवल तेरा राज नहीं, कुछ मेरी भी चलती है ।

बस इतना सुनना था की वो नागिन सी फुफकारी,

उस चिमटे से कहाँ कहाँ जाने फिर हमको मारी ।। घर वाली की जय बोलो -2

अब तक मैं था समझ गया ये केवल उसका घर है,

वो इस घर की मालकिन और हम तो बस नौकर है ।

आप सभी से विनती मेरी पत्नी का  सम्मान करो ,

जो न पिटना चाहो तो पूरे हर अरमान करो ।।

‘घर वाली की जय बोलो घर वाली की जय ”

 

इसे भी पढ़े : माँ बनी भिखारिन 

पति पत्नी हास्य कविता – पत्नी का आतंक Read More »

माँ बनी भिखारिन ……

माँ बनी भिखारिन ……

 

आजकल हर चौराहे पर कोई बूढी माँ भीख मांगते हुए नजर आ ही जायेगी, परन्तु एक फर्क है पहले सिर्फ मांगते थे परन्तु आज कल हाथ में कोई न कोई सामान  जैसे कलम, या पेंसिल होता है ….

अकेलानंद की लिखी हुई रचना इसी विषय पर आधारित है –

भीख मांगते हुए

देखी एक नारी थी किसी की महतारी,

आज बनके भिखारी वो बेचारी नजर आती है ।

दिल में अरमान लिए हाथ में सामान लिए,

हथेली पर जान लिए भागी चली जाती है ।।

हाथ जोड़ बोलती वो आधी सांस छोडती वो,

एक एक करके सभी के पास जाती है ।

कोई दुत्कार देता कोई फटकार देता,

कोई कुछ देता पर बुरा नहीं वो मानती है ।।

अपने अतीत को याद करते हुए.

बेटी होती है पराई, बन बहु घर आई,

खूब बजी शहनाई हुई उसकी सगाई थी ।

बीता कुछ साल  हुआ सुन्दर सा लाल,

खूब मचा था धमाल, खुशहाली बड़ी आयी थी ।।

गए दिन रैन खुशियों से भरे नैन,

आज दूल्हा बनकर बेटा घोड़ी पर सवार था ।

बहू सुंदर सी आयी थी दहेज़ खूब लायी,

अपने रंग रूप का उसको खुमार था ।।

बोली एक बात सुनो मेरे प्राणनाथ,

नहीं ऐसे है हालात जो इनको भी पालो तुम ।।

मानो मेरा कहना नहीं संग इनके रहना,

आज ही माँ बाप को घर से निकालो तुम ।

है किस्मत की मारी अब बनी दुखियारी,

आज अपनों से हारी सारी दुनिया ये जानती है ।।

कोई नहीं अपना जो पूरा करे सपना,

अपने पराये सबको वो पहचानती है ।

आखिर में आप सबसे एक बात कहना चाहूँगा की माँ बाप को घर से निकालने में बहू का हाथ होता है,

परन्तु एक कड़वा सच ये भी है की इसमें बेटे का भी साथ होता है

है बिनती हमारी सुनो बेटा बहू  प्यारी,

माँ बाप की जो सेवा की तो सारे सुख पाओगे ।

किया घर से बेघर  दुखी होगा ईश्वर।

फिर एक दिन तुम भी बेघर किये जाओगे ।।

इसे भी पढ़े – पिता ही परम पिता 

कवि – बीरेंद्र गौतम “अकेलानंद

माँ बनी भिखारिन …… Read More »

मुझे वोट देने का क्या लोगे तुम

मुझे वोट देने का क्या लोगे तुम –

 

मुझे वोट देने का क्या लोगे ?

नेता जी का कथन –

रुपया या पैसा नगद लोगे तुम

या बिजली पानी मुफत लोगे तुम

वोटर मेरे ये बता दे मुझे

मुझे वोट देने का क्या लोगे तुम

बस में फ्री का टिकट लोगे तुम

या वादों के मीठे शब्द लोगे तुम

चाचा मेरे ये बता दो मुझे

मुझे वोट देने का क्या लोगे तुम

अरे कुछ तो बोल, मुंह तो खोल

दारु की नदिया बहा दुंगा

जिस भी हिरोइन का नाम बता

गलियों में तेरे नचा दुंगा

अब पीने की कोई जगह लोगे तुम

चखने में चिकन मटन लोगे तुम

वोटर मेरे ये बता दे मुझे

मुझे वोट देने का क्या लोगे तुम

वोटर का जवाब – 

झूठा है वादा तेरा, ऐतबार कोई नहीं

बेईमान सब है बड़े, इमानदार कोई नहीं

तू स्वार्थी है कपटी है , पागल बनाता है

जब जीत जाता है आँखे दिखाता है

अपना भी जमीर है ऐसा थोड़े होता है

वोट के बदले सदा नोट नहीं होता है

अरे जिसको भी चाहे पिला दोगे तुम

नशे में साथ अपने मिला लोगे तुम

नेता मेरे ये बता दे मुझे ,

यंहा से भाग जाने का क्या लोगे तुम

मेरे देश को बचाने का क्या लोगे तुम

 

मुझे वोट देने का क्या लोगे तुम Read More »